Patient Info

Arjun Kurup

अपने नवजात शिशु को जानें

  • ९ महीने (४० सप्ताह) में जन्मे एक नवजात का औसत वजन 2.5 - 3.5 किलोग्राम होता है।

  • स्तनपान शिशु के लिए सबसे अच्छा आहार है, आप जितनी जल्दी स्तनपान शुरू करेंगे, उतनी जल्दी दूध शिशु के लिए पर्याप्त होगा।

  • बच्चे के साथ बातचीत करें क्योंकि हर पल बच्चा अपनी माँ से सीख रहा है।

  • बच्चे को केवल साफ हाथों से स्पर्श/पकड़ें।

  • हमेशा बच्चे के सिर और गर्दन को सहारा दें।

  • बच्चे कभी भी साइड में न रखें, हमेशा पीठ पर रखें ताकि उसका दम घुट न जाए।

  • नाभि पर कुछ भी नहीं लगाना चाहिए

  • बच्चे को माँ के दूध और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं/सप्लीमेंट के अलावा कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए ।

अपने नवजात शिशु को जानें

  • पहले २४ घंटे के अंदर बच्चे को कम से कम एक बार पेशाब करना चाहिए।

  • उसके बाद बच्चे अगले ४८ घंटे में २-३ बार पेशाब करते हैं।

  • तीसरे दिन के बाद उन्हें हर २४ घंटे में कम से कम ५-६ बार पेशाब करना चाहिए।

  • शुरू में, अधिकांश शिशुओं का वजन ३ से ५दिन तक कम हो जाता है।

  • इसके बाद शिशुओं का वजन बढ़ना शुरू हो जाता है।

  • जन्म के समय का वजन पहले २ हफ़्तों में वापस आ जाता है।

  • पहले २४ घंटों के अंदर बच्चे कम से कम एक बार संडास करना चाहिए। शुरू में, बच्चे काला टार जैसा संडास (मेकोनियम) करते है।

  • तीसरे दिन के आसपास, संडास हल्के हरे रंग का हो जाता है, जिसे साफ करना आसान होता है।

  • बच्चे दिन में १०-१२ बार से लेकर हर ४-५ दिनों में एक बार संडास कर सकते हैं।

  • संडास का रंग चिकनी मिट्टी के रंग का या सफेद या खून के धब्बे वाला नहीं होना चाहिए।

इन कारणों की जाँच करें

  • भूक
  • गर्मी या ठण्ड
  • थका हुआ होना
  • अकेले होना
  • ऊबना और खेलना चाहना
  • गीला डायपर
  • गैस या डर

शिशु का देखबल

  • पहले कुछ महीनों में शिशुओं को तापमान में कठिनाई होती है और शरीर की गर्मी कम होने लगती है।
  • इसलिए इन्हें कपड़े में लपेटकर रखना चाहिए।
  • सिर और पैरों को ढक कर रखना चाहिए।
  • शिशुओं को आपसे कपड़ों की सिर्फ़ एक परत अधिक पहनाई जानी चाहिए।
  • बच्चे के लिए सूती कपड़े का उपयोग करें।
  • छूने पर हाथों और पैरों का तापमान पेट के तापमान के समान महसूस होना चाहिए।

दस्ताने,मोजे और सूती कपड़े
  • गर्भनाल को सूखा रखना चाहिए और यह आमतौर पर ४-७ दिनों तक गिर जाता है।
  • नाभि पर कोई मलहम या पाउडर लगाने की जरूरत नहीं है।
  • शिशुओं को गुनगुने पानी से नहाने से पहले गुनगुने तेल से मालिश दी जा सकती है।
  • नारियल का तेल अन्य तेलों की तुलना में बेहतर होता है।
  • मालिश के लिए किसी भी औषधीय तेल का प्रयोग ना करें।